दिल की तेज़ धड़कन यानी पलपिटेशन को ज़्यादातर लोग आम तौर पर तनाव, कैफीन या थकावट से जुड़ी अस्थायी प्रतिक्रिया मानते हैं। लेकिन हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों ने हाल ही में इस पर गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि लगातार या बार-बार होने वाली तेज़ धड़कन को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह दिल के दौरे (हार्ट अटैक) या ब्रेन स्ट्रोक जैसे जानलेवा हालात का संकेत भी हो सकता है।

हार्वर्ड की रिपोर्ट में बताया गया कि जब शरीर लगातार तनाव में रहता है, तब उसमें एपिनेफ्रिन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। ये हार्मोन ना केवल दिल की धड़कन को तेज़ करते हैं, बल्कि ब्लड प्रेशर को भी असामान्य रूप से बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होना धमनियों को नुकसान पहुंचाता है और हृदय प्रणाली पर भारी असर डालता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेज़ धड़कन के साथ चक्कर आना, सांस फूलना, सीने में दबाव, या अचानक पसीना आना जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यह दिल के दौरे की शुरुआत हो सकती है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है।

इसके अलावा महिलाओं में “मेंटल स्ट्रेस इस्कीमिया” नामक एक विशेष स्थिति देखी गई है जिसमें मानसिक तनाव की वजह से हृदय की रक्त आपूर्ति प्रभावित होती है — और यह बिना किसी पारंपरिक लक्षण के भी जानलेवा बन सकती है।
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी को बार-बार धड़कन तेज़ होने की शिकायत हो रही हो, तो ECG, होल्टर मॉनिटरिंग जैसे परीक्षण जरूर कराएं।तनाव आज की लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है, लेकिन जब दिल तेज़ी से सिग्नल देने लगे, तो समझ जाइए — शरीर खतरे की घंटी बजा रहा है। समय रहते समझदारी दिखाएं, दिल को हल्के में न लें।





